तब परिस्थितियों से लड़ने का साहस बना रहता है। ये बात महाभारत के भीष्म पितामह और पांडवों से जुड़े प्रसंग से समझ सकते हैं… महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर थे