पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन विधि मंत्र सहित प्राण प्रतिष्ठा विधि
पार्थिव शिवलिंग का निर्माण

ॐ ह्णाँ पृथिव्यै नमः ।
इस मंत्र को बोलकर के भूमि से प्रार्थना करें और कम से कम 12 ग्राम मिट्टी लेवे जल में मिलाकर मिट्टी को गुँथ ले ।
ॐ महेश्वराय नमः कहकर शिवलिंग बनाएं यह अंगूठे से छोटा ना हो और अंगूठे से बड़ा ना हो मिट्टी की नन्ही गोलियां बनाकर शिवलिंग के ऊपर रखें यह वज्र कहलाता है काँसा आदि के पात्र में बिल्व पत्र रखकर उस पर निम्नलिखित मंत्र पढ़कर शिवलिंग की स्थापना करें ।
प्राण प्रतिष्ठा मंत्र का विनियोग- प्रतिष्ठा से पूर्व जल ग्रहण कर निम्न रूप से विनियोग करें
ॐ अस्य श्रीप्राणप्रतिष्ठामंन्त्रस्य ब्रह्मविष्णुमहेश्वरा ऋषयः ऋग्यजु: सामानिच्छन्दांसि क्रियामयवपु प्राणाख्या देवता आँ बींज ह्णिं शक्त्यै क्रौं कीलकं देव प्राणप्रतिष्ठापने विनियोग: ।
इतना कहकर जल भूमि पर छोड़े
प्राण प्रतिष्ठा हाथ में पुष्प लेकर उसे मूर्ति पर स्पर्श करते हुए नीचे लिखे मंत्र बोले
ॐ ब्रह्मविष्णुरूद्र ऋषिभ्यो नमः शिरसि ।
ॐऋग्यजु:, नम: गुह्णे।
ॐप्राणाख्यदेवताये नमः ह्णदि ।
ॐ आँ बीजाय नमः, गुह्ये।
ॐ ह्रीं शक्त्यै नमः,पादयो:।
ॐ क्रौं कीलकाय नमः, सर्वाडरिषु।
इस प्रकार न्यास करके पुनः पार्थिव शिवलिंग का स्पर्श करें
ॐ आँ ह्णीं क्रौँं यँ रँ लॅँ वँं शँ थँ सँ हँ सः सोऽहं शिवस्य प्राणा इह प्राणाः।
ॐ आँ ह्णीं क्रौं यँ रँ लँ वँं शँ पँ सँ हँ सः सोऽहं शिवस्य जीव इह स्थितः ।
ॐ आँ ह्णीं क्रौँं यँ रँ लॅँ वँं शँ थँ सँ हँ सः सोऽहं शिवस्य सर्वेन्द्रियाणिवाइ्मनस्त्वक्चक्षु:श्रोत्रघ्राणजिह्वापाणिपादपायूपस्थानि इहागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा।
तदनन्तर अक्षतसे आवाहन करे।
ॐ भूः पुरुषं साम्बसदाशिवमावाहयामि ।
ॐ भुवः पुरुष साम्बसदाशिवमावाहयामि।
ॐ स्वः पुरुॺ साम्बसदाशिवमावाहयामि।
ॐ स्वामिन् सर्वजगन्नाथ यावत्पूजावसानकम्।तावत्त्वम्प्रीतिभावेन लिंडस्मिन् सन्निधि कुरु ॥
प्रतिष्ठा – ॐ शूलपाणये नमः हे शिव इह प्रतिष्ठितो भव । यह कहकर शिवलिंग की प्रतिष्ठा करें।
ॐ अस्य श्रीशिवपंचाक्षरमंन्त्रस्य वामदेव ऋषिरनुष्टुप्छन्द: श्री सदाशिवो देवता, ओंकारो बीजम् नमः शक्ति शिवाय इति कीलकम् ,मम् साम्बसदाशिव प्रीत्यर्थ न्यासे पार्थिव लिंग पूजने जपे च विनियोग।
ॐ वामदेवॺये नमः शिरसि ।
ॐ अनुष्टुप्छन्द से नम: ।
ॐ सदाशिव देवतायै नमः हृदि ।
ॐ बीजाय नम: गुह्ये ।
ॐ शक्तये नमः, पादयों: ।
ॐ शिवाय कीलकाय नमः, सर्वाडे।
ॐ न तत्पुरूषाय नमः हृदयें।
ॐ मं अघोराय नमः पादयोंः।
ॐ शिं सद्योजाताय नमः, गुहों ।
ॐ वां वामदेवाय नम : मूध्नि् ।
ॐ मं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ शिं आनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ वां कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ यं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
ॐ नं शिरसे स्वाहा।
ॐ मं शिखायै वरषट्।
ॐ शिं कवचाय हुम्।
ॐ वां नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ यं अस्त्राय फट्।
इस प्रकार न्यास करनेके पश्चात् भगवान साम्बसदाशिवका
ध्यानपूर्वक पूजन करें-
ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रां वतंसं।
रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।।
पद्मासीनं समंतात् स्तुततममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं।
विश्वाद्यं विश्वबद्यं निखिलभय हरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।
ध्यान करने के बाद में बिल्बपत्र पुष्प और अक्षत शिव को अर्पण करें
और अपनी यथाशक्ति अनुसार भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें अलग-अलग कामना के लिए अलग-अलग चीजों से अभिषेक किया जाता है लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने की रस से वंश वृद्धि के लिए दूध से शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से आदि ।
वैदिक शिव पूजन
भगवान शंकर की पूजा के समय सुदर्शन पर बैठकर पहले आसमान पवित्री धारण शरीर शुद्धि और आसन शुद्धि कर लेनी चाहिए पूजन सामग्री को यथाएं स्थान रखकर रक्षादीप प्रज्वलित कर लें स्वस्ति पाठ करें इसके बाद पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश एवं भगवती गौरी का ध्यान पूर्वक पूजन करना चाहिए रुद्राभिषेक लघु रूद्र महारुद्र या सहस्त्रार्चन आदि विशेष अनुष्ठानों में नवग्रह कलश ॺोणशमातृका आदि का भी पूजन करना चाहिए यदि ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक कर्म संपन्न हो रहा हो तो पहले उनका पद प्रचलन पूर्वक वर्ग चंदन पुष्प माला आदि से अर्जुन करें फिर वरणीय सामग्री हाथ में ग्रहण कर संकल्प पूर्वक उनका वर्णन करें
उनके परिकर पारिच्छद एवं पार्षदो का भीपूजनकियाजाता हैं।संक्षेपमें उसे भी यहाँ दिया जा रहा है।
नन्दीश्वर-पूजन
ॐ आर्यं गौः पश्निरक्रमीदसदन् मातरं पुर:। पितरं च प्रयन्त्स्व: ।।पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करे-
ॐ प्रैतु वाजी कनिक्रदन्नानदद्रासभः पत्वा।
भरन्नग्निं पुरीष्यं मा पाद्यायुषः पुरा।॥।
वीरभद्र-पूजन
ॐ भद्र कर्णेभि: श्रुणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।स्थिरैरडैस्तुष्टुवा सस्तनूभिव्यशेमहि देवहितं यदायु: ॥पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करे
ॐ भद्रो नो अग्निराहुतों भद्रा रातिः सुभग भद्रों अध्वरः।भद्रा उत प्रशस्तय: ।
कार्तिकेय पूजन
ॐ यदकन्दः प्रथम्म जायमान उद्यन्त्समुद्रादुत वा पुरीषात्।
श्येनस्य पक्षा हरिणस्य बाहू उपस्तुत्यं महि जात ते अरवन् ॥
पूजन करके नीचे लिखी प्रार्थना करे
ॐ यत्र बाणाः सम्पतन्ति कुमारा विशिखा इव। तन्न इन्द्रों
ब्रहस्पतिरदितिः शर्म यच्छतु विश्वाहा शर्म यच्छतु ॥
कुबेर-पूजन
ॐ कुविदड्ग यवमन्तो य्वं चिद्यथा दान्त्यनुपूर्वं वियूय।
इहेहैषां कृणुहि भोजनानि ये बरहिंपो नम उक्ति यजन्ति ॥
कीति॔मुख-पूजन
ॐ असवे स्वाहा वसवे स्वाहा विभुवे स्वाहा विवस्वते स्वाहा
गणाश्रिये स्वाह्म गणपतये स्वाहाऽभिभुवे स्वाहाऽधिपतये स्वाहा शूषाय स्वाहा स सपोय स्वाहा चन्द्राय स्वाहा ज्योतिषे स्वाहा मलिम्लुचाय स्वाहा दिवा पतयते स्वाह्ा३ ॥
ॐ ओजश्च में सहश्च मं आत्मा च में तनूश्च में शर्म च में वर्म च मेऽड्ञानि च मेऽस्थीनि च मे परू षि च में शरीराणिच में आयुश्च में जरा च में यज्ञन कल्पन्ताम् !
सर्प-पूजन
जलहरीमें सर्पका आकार हो तो सर्प का पूजनकर पश्चात्
धूपदीप नैवेध आरती करके भगवान का पूजन करें
आशा है कि इस विधि से आपको मन में शांति प्राप्त हुई होगी इस विधि को अपने से भक्ति की भाव और श्रद्धा से लाभ प्राप्त होता है ।