हनुमान चालीसा रात में पढ़ने के फायदे

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1. भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा:
हनुमान जी को भय नाशक और बुरी शक्तियों से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है। चालीसा का नियमित पाठ मन को निडर बनाता है।

2. मानसिक शांति और एकाग्रता:
इसका पाठ मन को स्थिर करता है और चिंता, तनाव व अवसाद से राहत देता है।

3. स्वास्थ्य लाभ:
सकारात्मक ऊर्जा से शरीर और मन दोनों पर अच्छा असर पड़ता है, जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है।

4. बाधाओं का नाश:
जीवन में आने वाली अड़चनों, विशेष रूप से नौकरी, परीक्षा या व्यापार में आने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद मिलती है।

5. भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति:
भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति को मजबूत करता है, जिससे आत्मिक शुद्धता और आंतरिक शक्ति बढ़ती है।

6. राहु-केतु और शनि दोषों से राहत:
ज्योतिष के अनुसार, हनुमान चालीसा पाठ विशेष रूप से शनि और राहु-केतु के दुष्प्रभाव को कम करता है।

7. स्वप्न दोष और डरावने सपनों से मुक्ति:
रात को सोने से पहले चालीसा पढ़ने से बुरे सपनों और डर से राहत मिलती है।

 

हनुमान चालीसा
(लेखक: गोस्वामी तुलसीदास)

दोहा:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार।।

चौपाई:
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।।

संकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए।।

रघुपति कीन्ही बहुत बढ़ाई।
तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै।।

भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।

अंतकाल रघुबरपुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

दोहा:
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा:
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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