पद्मपुराण में भगवान शिव ने बताया है, तुलसी की पूजा का पुण्य, इसके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी

0
Spread the love

Tulsi Puja: पद्मपुराण में भगवान शिव ने बताया है, तुलसी की पूजा का पुण्य, इसके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। आपको बता दें कि भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है। यह सभी बातें पद्मपुराण में बताई गई हैं।

भगवान विष्णु की पूजा

गुरु पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। आपको बता दें कि भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो श्री भगवान की प्रतिमाओं शालीग्राम पर चढ़े हए तुलसीदल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करता है, वह श्री विष्णु को प्राप्त होता है । जो श्रीहरिकी पूजा करके उन्हं निवेदन किए हुए तुलसीदल को अपने मस्तकपर धारण करतां है, वह पापसे शुद्ध होकर स्वर्गलोक को प्राप्त होता है। यह सभी बातें पद्मपुराण में बताई गई हैं।

 

 

 

 

विष्णु जी को प्रिय है तुलसी

पद्मपुराण में भगवान शंकर ने कार्तिकेय जी को तुलसी दल की महिमा बताते हुए कहा है कि सब प्रकार के पत्तों ओर पुष्पों की तुलना में तुलसी ही श्रेष्ठ मानी गई है। यह सभी कामनाओंको पूर्ण करने वाली श्री विष्णुको अत्यन्त प्रिय है। जैसे भगवान्‌ श्रीविष्णु को लक्ष्मी प्रिय है, उसी प्रकार यह तुलसीदेवी भी परम प्रिय है।

तुलसीदल के बिना वो भोग स्वीकार नहीं करते

 

 

 

तुलसीदल के बिना श्री विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते। किसी दूसरे पत्ते, चन्दन आदि के लेप से भगवान्‌ श्रीविष्णु को उतना सन्तोष नहीं होता, जितना तुलसी दल से होता है। जिसने तलसीदल से पूरी श्रद्धा के साथ प्रतिदिन भगवान्‌ श्री विष्णुका पूजन किया है, उसने दान, होम, यज्ञ ओर त्रत आदि सभी का पूर्णंफल मिलता है ।

मंञ्जरी वाले तुलसी के दलों से भगवान्‌ श्री विष्णुकी पूजा

कहा जाता है कि तुलसीदल से भगवान की पूजा कर लेने पर कान्ति, सुख, लक्ष्मी, श्रेष्ट कुल, पुत्र, कन्या, धन, राज्य, आरोग्य, ज्ञान, विज्ञान, वेद, पुराण, तन्त्र और संहिता सब कुछ मिल जाता है।अगर मंञ्जरी वाले तुलसी के दलों से भगवान्‌ श्री विष्णुकी पूजा की जाए तो उसके पुण्य फल का वर्णन करना असम्भव है।

जहां तुलसी होती है, वहीं भगवान्‌ श्रीकृष्ण होते हैं

जहां तुलसी होती है, वहीं भगवान्‌ श्रीकृष्ण होते हैं, वहीं ब्रह्मा ओर लक्ष्मीजी भी सम्पूर्णं देवताओ के साथ विराजमान होते हैं । इसलिये अपने घर के पास तुलसीदेवी को रोपकर उनकी पूजा करनी चाहिए । तुलसी के निकर जो स्तोत्र-मन्त्र आदि का जप किया जाता है, वह सब अनन्तगुना फल देनेवाला होता हे।

शालिग्राम-शिलाओं पर चढ़े हए तुलसीदल प्रसाद

प्रेत, पिशाच, कूष्माण्ड, ब्रह्मराक्षस, भूत औरर दैत्य आदि तुलसी के वृक्ष से दूर भागते हैं। श्री भगवान की प्रतिमाओं और शालिग्राम-शिलाओं पर चढ़े हए तुलसीदल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करता है, वह श्रीविष्णु के पास जाता है। जो श्रीहरि की पूजा करके उन्हें निवेदन किए हुए तुलसीदल को अपने मस्तक पर धारण करता है, वह पापसे शुद्ध होकर स्वर्गलोक को प्राप्त होता है ।

 

तुलसी से भगवान्‌ श्रीविष्णु की पूजा करने वाले का कभी पुनर्जन्म नहीं होता

कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान, रोपण ओर धारण करने से वह पाप को जलाती ओर स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करती हैं। जो तुलसी के पूजन आदि का दूसरों को उपदेश देता ओर स्वयं भी आचरण करता है, वह भगवान्‌ श्रीलक्ष्मीपति के परम धाम को प्राप्त होता है ।जिसने तुलसी की शाखा और कोमल पत्तियों से भगवान्‌ श्रीविष्णु की पूजा की है, उसका कभी पुनर्जन्म नहीं होता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

शिवलिंग चांदी के हो तो क्या होता है