भगवान श्री कृष्ण द्वारा गीता उपदेश

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भगवान श्री कृष्ण द्वारा गीता उपदेश से
श्लोक:

वासुदेव सुतं देवं कंसचाणूरं मर्दनम्।
देवकी परमानंदम कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

 

 

 

 

 

 

 

 

संपूर्ण अर्थ:

मैं वासुदेव के पुत्र, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करता हूँ, जो देवता हैं, दुष्ट कंस और अन्याय करने वालों का नाश करने वाले हैं, जिन्होंने ब्रजभूमि में जन्म लिया। मैं संपूर्ण जगत के स्वामी, हरि को नमन करता हूँ।

श्रीमद्भागवद्गीता
के प्रथम अध्याय, प्रथम श्लोक है। इसे मैं संपूर्ण अर्थ सहित प्रस्तुत कर रहा हूँ।

श्लोक (अध्याय 1, श्लोक 1)

धृतराष्ट्र उवाच |
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः |
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||

–शब्दार्थ:

1. धृतराष्ट्र उवाच – धृतराष्ट्र ने कहा

2. धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे – धर्म का क्षेत्र और युद्ध का स्थल, अर्थात कुरुक्षेत्र में

3. समवेता युयुत्सवः – एकत्रित होकर युद्ध करने के इच्छुक सैनिक

4. मामकाः पाण्डवाश्चैव – मेरे पुत्र (कौरव) और पाण्डव भी

5. किमकुर्वत – क्या कर रहे हैं

6. सञ्जय – हे सञ्जय (धृतराष्ट्र के सारथी और दृष्टा)

संपूर्ण अर्थ:

धृतराष्ट्र ने अपने सारथी सञ्जय से पूछा:
“हे सञ्जय! धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में मेरे पुत्र और पाण्डु के पुत्र युद्ध करने के लिए एकत्रित हुए हैं। वे अब क्या कर रहे हैं?”

–यह श्लोक गीता के प्रारंभ में युद्ध के मैदान और उस समय की स्थिति का परिचय देता है।
अध्याय 1, श्लोक 2

श्लोक 1.2 (संस्कृत में)

सञ्जय उवाच |
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा |
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ||
अर्थ

यह श्लोक संजय द्वारा धृतराष्ट्र को सुनाए जा रहे संवाद का भाग है। यहाँ पर घटित घटना का वर्णन है:

सञ्जय उवाच – संजय ने कहा (धृतराष्ट्र के प्रति संजय की कथा सुनाना)।

दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं – पांडवों की सेना को युद्धभूमि में व्यवस्थित (व्यवस्थित रचना) होते हुए देखकर।

दुर्योधनः तदा – उस समय दुर्योधन (कौरवों के राजा और पांडवों का विरोधी)।

आचार्यम् उपसङ्गम्य – अपने गुरु (भृगु?) या आचार्य द्रोण से मिलने गया।

राजा वचनम अभ्रवीत् – राजा (दुर्योधन) ने बोलकर अपने विचार प्रकट किए।

सारांश:
दुर्योधन, जब पांडवों की सेना युद्ध के लिए व्यवस्थित स्थिति में दिखाई दी, तो वह अपने गुरु द्रोण के पास गया और उनसे बातें करने लगा। यह श्लोक युद्ध की प्रारंभिक परिस्थिति और कौरवों के मनोभाव को दर्शाता है।
प्रतिदिन तीन से चार श्लोक अर्थ सहित पोस्ट करतार रहूंगा।
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