सावन: कैसे करें शिवलिंग की स्थापना? जानें शिव महापुराण में वर्णित है संपूर्ण विधि

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हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इस माह में शिवलिंग का पूजन व जलाभिषेक करने से पुण्य मिलता है। जानें घर पर कैसे करें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सावन का महीना शुरु हो गया है। सावन माह में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। विशेष रूप से सावन माह में शिव भक्त शिवलिंग की घर पर स्थापना कर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव का जलाभिषेक करने से मनुष्य की मनवांछित मनोरथ मिलता है और अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है। जानें सावन में घर पर कैसे करें शिवलिंग की स्थापना

शिवलिंग का आकार

चल प्रतिष्ठा के लिए छोटा शिवलिंग श्रेष्ठ माना जाता है। अचल प्रतिष्ठा यानी मंदिरों के लिए बड़ा शिवलिंग अच्छा रहता है। शिवलिंग की पीठ सहित स्थापना करनी चाहिए। शिवलिंग की पीठ गोल, चौकोर व त्रिकोण के पाए की भांति ऊपर नीचे मोटा और बीच में पतला होना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार, ऐसा लिंग पीठ महान फल देने वाला होता है। मिट्टी से शिवलिंग को बनाना चाहिए। घर पर स्थापित शिवलिंग की लंबाई बारह अंगुल के बराबर यानी 12 इंच के बराबर होनी चाहिए। इससे कम होने पर शिव पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता है।

 

 

 

 

शिवलिंग की घर पर कैसे करें स्थापना-

शिव पुराण के अनुसार, सबसे पहले भगवान शिव को श्वेत चंदन के जल से स्नान कराएं। श्वेत कमल से ही उनका पूजन कर हाथ जोड़कर प्रणाम करें। अब शिवलिंग को कमल के आसन पर विराजमान करें। अब शिवलिंग और माता पार्वती का विधिवत पूजन करें। फिर धूप-दीप जलाकर सुगंधित वस्तुओं से सुरभित करें। अब भगवान शिव और माता पार्वती को नए वस्त्र पहनाएं। उन्हें खीर का नैवेद्य अर्पित कर घी का दीपक जलाएं। मंत्रोच्चारण करते हुए भगवान शिव की परिक्रमा करके हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।

शिवलिंग का जलाभिषेक करने का फल- शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-शांति मिलती है। रोगों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति और मनवांछित फल की पूर्ति होती है।

 

 

 

 

 

सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं, नोट करें बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र

सावन की पूजा में बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने से शिव जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

 

भोलेनाथ को समर्पित सावन का महीना शुरू हो चुका है। इस साल ये महीना 9 अगस्त तक रहने वाला है। इस पूरे महीने भक्त महादेव की भक्ति में डूबे नजर आएंगे। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया जाता है। भोले बाबा को बिल्व पत्र बेहद प्रिय माना जाता है। ये पत्तियां त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने से शिव जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। इसलिए आइए जानते हैं सावन की पूजा के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम और मंत्र

सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?

  • बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे पवित्र जल से धो लेना चाहिए
  • बेलपत्र का चिकना हिस्सा (सीधा भाग) शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए
  • बेलपत्र 3, 5, 11, या 21 की संख्या में चढ़ा सकते हैं
  • शिवलिंग पर बेलपत्र इस तरह चढ़ाना चाहिए कि बेलपत्र का डंठल आपकी ओर हो
  • बेलपत्र चढ़ाते समय मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायक होता है। अगर आपको बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र नहीं याद है तो आप ॐ नमः शिवाय मंत्र पढ़कर भी बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं
  • बेलपत्र न होने पर शिवलिंग पर चढ़ाया गया बेलपत्र वापस पानी से धुलकर भी चढ़ाया जा सकता है

 

 

 

कैसा होना चाहिए बेलपत्र?

  1. बेलपत्र कम से कम तीन पत्तियों वाला होना चाहिए
  2. कटा-फटा या छेद वाला बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए
  3. शिवलिंग पर हमेशा ताजा और हरा-भरा बेलपत्र ही अर्पित करें। बेलपत्र की मुरझाई पत्तियां नहीं चढ़ानी चाहिए
  4. कोशिश करें दाग-धब्बे वाला बेलपत्र न चढ़ाएं

नोट करें बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र

नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो

दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥

दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌।

अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌।

त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌॥

अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌।

कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥

गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर।

सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय॥

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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